रतलाम: रणायरा की बेटी रुचिका भट्ट ने पूरा किया दादाजी का सपना: चुनौतियों को मात देकर NEET में पाई सफलता, भोपाल के मेडिकल कॉलेज में मिला MBBS प्रवेश…

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रतलाम / जन वकालत न्यूज। दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है रतलाम जिले के छोटे से गांव रणायरा की होनहार बेटी रुचिका भट्ट ने। तमाम अनिश्चितताओं, उतार-चढ़ावों और मुश्किलों से जूझते हुए रुचिका ने NEET-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भोपाल के प्रतिष्ठित RKDF मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट हासिल की है। अपने दादाजी स्वर्गीय मदन लाल जी भट्ट और पिता दिलीप कुमार जी भट्ट के ‘डॉक्टर’ बनाने के सपने को साकार कर रुचिका अब अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि समूचे रणायरा क्षेत्र में उत्साह और हर्ष का माहौल है।

11वीं से शुरू हुआ सफर, अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट पर जताया भरोसा-

​रुचिका ने स्कूली शिक्षा के दौरान ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। कक्षा 11वीं में प्रवेश के साथ ही उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए रतलाम के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ‘अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट’ को चुना। शिक्षकों के सटीक मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और संशय निवारण सत्रों ने रुचिका के आत्मविश्वास को आधार दिया। वह रोजाना घंटों कठिन परिश्रम करती रहीं और संस्थान के अनुभवी शिक्षकों के बताए मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ती रहीं।

​असफलताओं और परीक्षा रद्द होने के संकट के बाद भी नहीं डिगा हौसला-

​रुचिका के लिए सफलता का यह मार्ग आसान नहीं रहा। NEET-2025 में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने खुद को बिखरने नहीं दिया, बल्कि अपनी कमियों का विश्लेषण कर दोगुने उत्साह के साथ NEET-2026 की तैयारी शुरू कर दी।
​3 मई को आयोजित NEET-2026 की परीक्षा में रुचिका ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर 540 अंक अर्जित किए। परंतु पेपर लीक प्रकरण के चलते जब परीक्षा रद्द हुई, तो किसी भी परीक्षार्थी की तरह उनके सामने भी भारी मानसिक दबाव और अनिश्चितता का दौर आया। इस कठिन मोड़ पर भी रुचिका ने अपना धैर्य नहीं खोया और निरंतर अध्ययन में जुटी रहीं। इसी जीवटता और निरंतरता का प्रतिफल रहा कि काउंसलिंग के प्रथम चरण में ही उन्हें RKDF मेडिकल कॉलेज, भोपाल में MBBS पाठ्यक्रम के लिए सीट आवंटित हो गई।

​भावुक पिता बोले: “बेटी ने बढ़ाया पूरे कुल का मान”-

​रुचिका के चयन पर उनके पिता श्री दिलीप कुमार भट्ट भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “रुचिका बचपन से ही सफेद कोट और स्टेथोस्कोप का सपना देखती थी। उसके दादाजी का सबसे बड़ा सपना था कि उनकी पोती डॉक्टर बनकर दीन-दुखियों की सेवा करे। 2025 के परिणाम और 2026 में परीक्षा रद्द होने जैसी विषम परिस्थितियों में जब भी वह निराश होती, हम उसका संबल बनते थे। अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट ने रुचिका को पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी दी। आज बेटी ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाकर पूरे परिवार और गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।”

​संस्थान की टीम पहुंची रणायरा, छात्रा और परिजनों को किया सम्मानित-

​रुचिका की इस शानदार सफलता पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट प्रबंधन व फैकल्टी सदस्यों की टीम रणायरा गांव पहुंची। वहां उन्होंने रुचिका, उनके पिता दिलीप भट्ट और परिजनों से भेंट कर मिठाई खिलाई एवं शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया।
​संस्थान के शिक्षकों ने रुचिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि रुचिका की लगन, अनुशासित दिनचर्या और कभी हार न मानने की प्रवृत्ति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। वहीं रुचिका ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग, दादाजी के आशीर्वाद और अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन को दिया।

​ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा-

​रुचिका भट्ट की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत कामयाबी नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश की उन सैकड़ों बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने का साहस करती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या चकाचौंध की मोहताज नहीं होती; यदि मन में अटूट विश्वास और संकल्प हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी सफलता के उच्चतम शिखर को छुआ जा सकता है।

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