
रतलाम/जनवकालत न्यूज। जवाहर नगर स्थित सुप्रसिद्ध चिंताहरण मगन भैरव मंदिर प्रांगण में इस वर्ष गणेश उत्सव अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक स्वरूप में मनाया जाएगा। उत्सव के पावन उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं 13 दिवसीय भव्य कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन तय किया गया है। भगवान श्री गणेश एवं महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित सनातन धर्म की प्रमुख पौराणिक कथाओं के सार पर आधारित यह अमृतमयी कथा 14 सितंबर (गणेश चतुर्थी) से प्रारंभ होकर 26 सितंबर (अनंत चतुर्दशी) तक चलेगी। कथा का दैनिक समय दोपहर 2:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक नियत किया गया है।



आयोजक ‘समस्त भगवान गणेश भैरव नाथ भक्त मंडल’ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रख्यात कथा प्रवक्ता पंडित हितेंद्र जोशी के मुखारविंद से इस वर्ष श्रद्धालु “विशेष कथाओं का सार का भंडारा” का श्रवण करेंगे। उत्सव के दौरान सनातन परंपरा और वैदिक रीति के अनुसार प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ के 108 पाठ अनवरत रूप से संपन्न होंगे, जिससे संपूर्ण वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा।

प्रतिदिन होने वाले कथा प्रसंगों की रूपरेखा:

- 14 सितंबर (गणेश चतुर्थी): श्री गणेश कथा सार
- 15 सितंबर (ऋषि पंचमी): ऋषि पंचमी कथा सार
- 16 सितंबर: देवी भागवत एवं शक्ति कथा सार
- 17 सितंबर: सत्यनारायण व्रत कथा सार
- 18 सितंबर: श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सार
- 19 सितंबर: श्रीमद्भगवद्गीता एवं भागवत महात्म्य
- 20 सितंबर: द्वादश (12) ज्योतिर्लिंग महिमा एवं कथा सार
- 21 सितंबर: मर्यादा पुरुषोत्तम राम लला कथा सार
- 22 सितंबर: लोकदेवता सत्यवीर तेजाजी महाराज कथा सार
- 23 सितंबर: देवाधिदेव महादेव—शिव कथा सार
- 24 सितंबर: शीश के दानी खाटू श्याम (बर्बरीक) कथा सार
- 25 सितंबर: भावी अवतार कल्कि पुराण कथा सार
- 26 सितंबर (अनंत चतुर्दशी): अनंत नारायण कथा सार एवं पूर्णाहुति
विशेष आकर्षण: प्राचीन मंदिरों की सिद्ध सुपारी का वितरण
कथा के समापन एवं पूर्णाहुति दिवस (26 सितंबर) पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर रतलाम शहर के प्राचीनतम गणेश मंदिरों से विधिवत पूजन उपरांत लाई गई विशेष सुपारी को अभिमंत्रित कर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी के रूप में वितरित किया जाएगा।आयोजन समिति एवं भक्त मंडल ने नगर तथा आसपास के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं, माताओं और बहनों से इस आध्यात्मिक महोत्सव में सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का विनम्र आग्रह किया है।
