
रतलाम/नागदा/जनवकालत न्यूज। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो सफलता किसी बड़े शहर या आधुनिक संसाधनों की मोहताज नहीं होती। इस बात को सच कर दिखाया है नागदा शहर के समीप स्थित मात्र 400 से 500 लोगो की आबादी वाले छोटे से गांव ‘मखला’ के रहने वाले जयवर्धन सिंह राठौड़ ने, पिता जीवन सिंह राठौड़ के होनहार बेटे जयवर्धन ने री-नीट (Re-NEET) 2026 की परीक्षा में 531 अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस शानदार सफलता के साथ ही जयवर्धन अपने गांव के पहले ऐसे विद्यार्थी बन गए हैं, जो एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर बनने जा रहे हैं।
इंदौर में मिली निराशा, रतलाम में जगी उम्मीद-
जयवर्धन की सफलता की यह राह आसान नहीं थी। 12वीं कक्षा पास करने के बाद, बेहतर तैयारी का सपना लेकर उन्होंने बड़े शहर का रुख किया और इंदौर के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में प्रवेश लिया। हालांकि, वहां उन्हें अपेक्षित व्यक्तिगत मार्गदर्शन नहीं मिल सका, जिसके चलते ‘नीट-2025’ में उनके अंक काफी कम आए। इस असफलता से जयवर्धन का आत्मविश्वास बुरी तरह डगमगा गया था।इसके बाद परिवार ने बड़े शहरों की चकाचौंध के बजाय एक ऐसे संस्थान की तलाश शुरू की, जहाँ बच्चे को सही मार्गदर्शन और व्यक्तिगत ध्यान मिल सके। इसी तलाश में जयवर्धन ने रतलाम की कई कोचिंग संस्थाओं का भ्रमण किया। अंततः डेमो क्लास लेने के बाद उन्होंने रतलाम के ‘अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट’ में प्रवेश लिया। यहाँ उन्होंने पूरे एक वर्ष बेहद अनुशासित वातावरण में दिन-रात एक कर पढ़ाई की और शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी को एक नई दिशा दी।
परीक्षा रद्द होने से टूटा था मनोबल, गुरु ने बढ़ाया हौसला-
तैयारी के बाद 3 मई को आयोजित पहली नीट (NEET) परीक्षा में जयवर्धन का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की खबर ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया। उन्हें लगने लगा था कि डॉक्टर बनने का उनका सपना शायद अब अधूरा ही रह जाएगा।इस मुश्किल और निराशाजनक समय में अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने एक सच्चे मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उन्होंने जयवर्धन का मनोबल गिरने नहीं दिया, उन्हें समझाया और पूरे आत्मविश्वास के साथ ‘री-नीट’ (Re-NEET) की तैयारी में फिर से जुटने के लिए प्रेरित किया।

21 जून की परीक्षा और शानदार परिणाम-
डॉ. कुमावत के मोटिवेशन और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर 21 जून को आयोजित री-नीट परीक्षा देने के बाद जयवर्धन पूरे आत्मविश्वास में थे। उनका दावा था कि पेपर बहुत अच्छा गया है। जब परिणाम घोषित हुए, तो उन्होंने 531 अंक हासिल कर अपने दावे को सच साबित कर दिया। उन्होंने यह दिखा दिया कि निरंतर मेहनत और सही दिशा से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
पूरे गांव के लिए गर्व का विषय-
इस शानदार परिणाम के बाद जयवर्धन के परिवार और पूरे मखला गांव में जश्न का माहौल है। जयवर्धन के बड़े पिताजी ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि, “जयवर्धन मखला गांव का पहला ऐसा विद्यार्थी है जो एमबीबीएस डॉक्टर बनेगा। यह उपलब्धि केवल हमारे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए बहुत बड़े गर्व का विषय है।”
सफलता का मूल मंत्र: मेहनत और सही मार्गदर्शन-
इस खास अवसर पर अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट, रतलाम के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने कहा, “किसी भी विद्यार्थी की मंजिल उसके शहर के आकार से नहीं, बल्कि उसकी खुद की मेहनत, अनुशासन और उसे मिलने वाले सही मार्गदर्शन से तय होती है। जयवर्धन ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया है कि छोटे गांवों के बच्चे भी बड़े सपनों को साकार करने का माद्दा रखते हैं।”
मखला गांव के इस होनहार लाल की सफलता आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है, जो एक बार मिली असफलता के बाद निराश होकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। जयवर्धन की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
